आशिर्वाद का महत्व

बहुत पुरानी बात है किसी गांव में एक ज्योतिषी आए थे उस गांव के सभी लोग अपने अपने हाथों ज्योतिषी को दिखाने लगे उसी गांव में एक बालक भी रहता था जिसकी मां नहीं थी वह अपने पिता के साथ रहता था वह भी ज्योतिषी के पास जाने का जिद कर रहा था उसके पिता ज्योतिषी के पास जाने को मना कर रहे थे पर बच्चा बहुत ज़िद्दी था वह अपने पिताजी के साथ ज्योतिषी के पास पहुंचा ज्योतिषी उस बच्चे का हाथ देखते हैं और देखते ही ज्योतिषी चिंतित पर जाते हैं वह कुछ बोलते नहीं हैं इस अवस्था में ज्योतिषी को देख कर बच्चे की पिता ज्योतिषी से पूछते हैं क्या हुआ मेरे बेटे के हाथ में कौन सी रेखा है तू ज्योतिषी चिंतित होकर बोलते हैं बच्चे की आयु सिर्फ छह छह माह की बची है इसे सुनकर बच्चे के पिता बच्चे के हाथ पकड़ कर अपने घर की तरफ चले जाते हैं क्योंकि बच्चे के पिता को पता था इसके आगे क्या करना है उन्होंने सीधा बच्चों का वित्त अयोग संस्कार करा दिया और उसे गायत्री मंत्र शांति पाठ सिखा दिए और बालक के और बच्चे के पिता ने उसे दिखाया की जो श्रेष्ठ जन मिले उन्हें अवश्य प्रणाम करें बालक ऐसा ही करना आरंभ कर दिया 6 माह पूर्ण होने की आई बालक को आयुष्मान भव आ का अपार आशीर्वाद मिल चुका था यमराज की हिम्मत भी हार गई आखिरकार यमराज को वापस जाना पड़ा उसके बाद आखिर में नारद जी को भेजा गया नारद जी जानना चाहते थे कि वह वाला को किस गांव में रहता है और उसकी मृत्यु ना होने का क्या कारण है नारद मुनी भ्रमण करते करते उसे गांव में पहुंचे दूर से ही उस बच्चे ने 1 दिन पुलिस को देखा एक दिव्य पुरुष को देखा दौड़कर नारद जी के चरण छू लिए नारद जी नारद जी भी उस बच्चे को आयुष्मान भव रहने का आशीर्वाद दिए अब तो समस्या और खड़ी हो गई ऋषि की वाणी झूठ तो जाती नहीं अंत में नारद मुनि बालक को लेकर ब्रह्मा के पास चल पड़े ब्रह्मांड में नारद मुनी आगे और बच्चा पीछे पीछे चला ब्रह्मा का सिहासन देखते ही बालक और परा और उनके भी चरण छू लिया ब्रह्मा ने भी आयुष्मान भव होने का आशीर्वाद दे दी नारद मुनि ने कहा महाराज यही वह बालक है जिसे देखने आपने मुझे भेजा था मैं पहचान नहीं पाया उस बच्चे को और आयुष्मान भव होने का आशीर्वाद दे दिया और आप भी इस बच्चे को आयुष्मान भव होने का आशीर्वाद दे दिए और ब्रह्मा जी भी 400 वर्ष की आयु बालक को दे दी

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